देहरादून: ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी सविन बंसल ने सख्त तेवर दिखाते हुए अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी कि जनशिकायतों के समाधान में अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

जिलाधिकारी ने कहा, “हेल्पलाइन पर आने वाला हर मामला एक परेशान, व्यथित नागरिक की आखिरी उम्मीद होती है। इसे केवल आंकड़ों में न देखें, संवेदनशीलता से काम लें।” उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि दो दिन के भीतर लंबित शिकायतों का निस्तारण किया जाए। साथ ही उन्होंने लंबित और टाइमबाउंड मामलों को बैठक में खुलवाकर स्वयं स्थिति का जायजा लिया।
मुख्य निर्देशों की झलक:
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सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध समाधान अनिवार्य।
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बार-बार आने वाली शिकायतों का स्थायी समाधान करें विभाग।
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संतोषजनक फीडबैक पर विशेष ध्यान दिया जाए।
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औपचारिकता नहीं, संवेदनशीलता से हो निस्तारण।
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निस्तारण न होने पर जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
इन विभागों की शिकायतें सर्वाधिक लंबित:
| विभाग | लंबित शिकायतें |
|---|---|
| पुलिस | 368 |
| यूपीसीएल | 361 + 242 |
| नगर निगम | 358 |
| जल संस्थान | 276 + 203 |
| लोनिवि | 252 + 272 |
| एमडीडीए | 177 |
| पेयजल निगम | 88 |
| स्वास्थ्य प्राधिकरण | 50 |
| अन्य (यूटीयू, यूयूएसडीए, सिंचाई, शिक्षा, वन आदि) | 20-35 |
जिलाधिकारी ने सभी विभाग प्रमुखों को चेताया कि हेल्पलाइन की शिकायतें शासन की प्राथमिकता हैं, और इसमें किसी प्रकार की टालमटोल या हीलाहवाली पर कार्यवाही तय मानी जाएगी।

डीएम का स्पष्ट संदेश:
“सीएम हेल्पलाइन केवल कॉल रिसीव करने का माध्यम नहीं, बल्कि शासन की गुड गवर्नेंस का दर्पण है। इसमें लापरवाही करने वाले अफसर जवाबदेही से नहीं बच पाएंगे।”
बैठक में उपस्थित:
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, सहित समस्त विभागों के अधिकारी।






