देहरादून। उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज (Demography Change) के बढ़ते मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार अब तकनीक के ज़रिए सख्त निगरानी की तैयारी में है। सीएम धामी ने गृह विभाग को एक स्पेशल मोबाइल एप (App) विकसित करने के निर्देश दिए हैं, जिसके माध्यम से प्रदेश में बाहरी लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल और प्रभावी बनाया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, ऐप का ट्रायल चल रहा है और अक्टूबर के अंत तक इसका संचालन शुरू हो जाएगा। इस ऐप के ज़रिए बाहरी राज्यों या जिलों से आकर काम करने वाले व्यक्तियों का पूरा डाटा पुलिस और प्रशासन के रिकॉर्ड में रहेगा।
क्या है सरकार की योजना (What is the plan?)
मुख्यमंत्री धामी ने गृह विभाग और पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि सत्यापन प्रक्रिया को कड़ा और सरल दोनों बनाया जाए।
अब तक पुलिस थानों में सत्यापन केवल रजिस्टर तक सीमित था, लेकिन अब एप के ज़रिए प्रत्येक व्यक्ति का डिजिटल डेटा बेस तैयार किया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय ने सभी थाना और चौकियों से पुराने रजिस्टरों में दर्ज रिकॉर्ड मंगवाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि इस जानकारी को ऐप से जोड़ा जा सके।
तकनीकी सहयोग से आसान होगी प्रक्रिया
कुमाऊं मंडल की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि सत्यापन की चुनौतियों को कम करने के लिए पुलिस प्रशासन तकनीक की मदद ले रहा है।
उन्होंने कहा — “अगर यह ऐप सफल हो गया तो यह न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि बाहरी लोगों के लिए भी प्रक्रिया को आसान बना देगा।”
क्यों ज़रूरी है यह कदम (Why this move matters?)
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Demographic Change) और बाहरी व्यक्तियों की पहचान से जुड़ी चिंताओं को लेकर लगातार चर्चा रही है।
इस नए ऐप के ज़रिए सरकार सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता दोनों को सुनिश्चित करना चाहती है।






