- देहरादून, 16 अक्टूबर 2025। दिव्यांगजनों के अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में देहरादून प्रशासन ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित स्थानीय स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक में 10 दिव्यांग व्यक्तियों को विधिक अभिभावक नियुक्त करने की संस्तुति दी गई। इस बैठक में ऑनलाइन प्राप्त 11 आवेदनों की गहन स्क्रूटनी की गई, जिनमें से 10 आवेदनों को मंजूरी मिली।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि दिव्यांगजनों के जीवन में अनेक परिस्थितियों में कानूनी प्रतिनिधित्व की आवश्यकता होती है। ऐसे में विधिक अभिभावक की नियुक्ति से न केवल उनके अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को बेहतर सुविधा और संरक्षक उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

इस दौरान कृष्णा कुटोला, अर्शदीप सिंह, सुनील कुमार भट्ट, अनिल कुमार, मनीष भट्ट, दीप सेठी, मोहम्मद फैज अंसारी, पूनम वर्मा, मुनिया शर्मा और राय सिंह को विधिक अभिभावक नियुक्त करने की अनुशंसा की गई।
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के तहत मानसिक व बौद्धिक दिव्यांगों को 18 वर्ष की आयु के बाद कानूनी संरक्षक प्रदान करने का प्रावधान है। इसके तहत दिव्यांगों की संपत्ति, बैंक खातों और देखभाल से संबंधित सभी कार्य उनके विधिक अभिभावक के माध्यम से संपन्न होंगे।
उन्होंने बताया कि अभिभावक बनने के लिए आवेदन thenationaltrust.gov.in वेबसाइट पर ऑनलाइन किए जा सकते हैं। साथ ही, सभी विधिक अभिभावकों को प्रत्येक छह माह में समाज कल्याण विभाग में फॉर्म-सी और फॉर्म-डी भरकर जमा करना अनिवार्य होगा।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, डीजीसी राजीव आचार्य, एलडीएम संजय भाटिया सहित दिव्यांगजनों के परिजन एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
यह निर्णय देहरादून जनपद के दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद की किरण लेकर आया है, जिससे वे आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ समाज में अपनी पहचान बना सकेंगे।






