देहरादून की पर्वतीय वादियों में शुक्रवार को राष्ट्रीय पोषण माह 2025 का भव्य समापन हुआ, जहाँ से गूंजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों का नारा — “सशक्त नारी, सुपोषित भारत”। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, जिन्होंने कहा कि “पोषण केवल योजना नहीं, यह हर माँ और बच्चे के प्रति हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।”
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस समारोह में देशभर से जुड़े आंकड़ों ने बताया कि इस वर्ष 20 करोड़ से अधिक पोषण गतिविधियाँ आयोजित हुईं — जिसने इसे वास्तविक अर्थों में “जन आंदोलन” बना दिया। श्रीमती ठाकुर ने बताया कि इस बार की खासियत यह रही कि अभियान में केवल महिलाएँ ही नहीं, बल्कि पुरुष और युवा वर्ग भी सक्रिय भागीदार बने।

अतिरिक्त सचिव श्री लव अग्रवाल ने मिशन पोषण 2.0 की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए बताया कि देश के 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सेवा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि 13 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन और पोषण ट्रैकर ऐप से जोड़ने से पारदर्शिता और डेटा सटीकता में क्रांति आई है। साथ ही उन्होंने बताया कि NFHS-5 सर्वे के अनुसार भारत में कुपोषण दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है — ठिगनापन 38.4% से घटकर 35.5% और कम वजन दर 35.8% से घटकर 32.1% हो गई है।
उत्तराखंड की मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने कहा कि “पोषण ही भारत की असली ताकत है,” वहीं कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी ने स्थानीय अन्न, मिलेट्स और पारंपरिक भोजन को “भारत की पोषण आत्मनिर्भरता की रीढ़” बताया। कार्यक्रम के दौरान पोषण चैंपियंस, मिशन शक्ति चैंपियंस और लाभार्थियों को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत ₹1.56 करोड़ की डीबीटी राशि भी वितरित की गई।
केन्द्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी के वीडियो संदेश ने माहौल को और प्रेरक बना दिया। उन्होंने कहा कि “हर स्वस्थ माँ ही सशक्त परिवार और विकसित भारत की आधारशिला है।” उन्होंने देशभर की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को “भारत की असली पोषण दूत” बताया।
इस वर्ष का पोषण माह छह प्रमुख विषयों — सजग भोजन, प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा, शिशु एवं छोटे बच्चों के लिए पोषण व्यवहार, पुरुषों की भागीदारी, वोकल फॉर लोकल, और डिजिटलीकरण — पर केंद्रित रहा। देहरादून से उठी यह पुकार सिर्फ एक समापन नहीं, बल्कि 2047 तक ‘सुपोषित भारत’ के निर्माण की शुरुआत है।






