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देहरादून में छाया ‘एआई का दौर’! जितिन प्रसाद बोले – एक डॉलर प्रति घंटे में विश्वस्तरीय कंप्यूटिंग शक्ति, भारत बनेगा ग्लोबल एआई लीडर

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देहरादून में छाया ‘एआई का दौर’! जितिन प्रसाद बोले – एक डॉलर प्रति घंटे में विश्वस्तरीय कंप्यूटिंग शक्ति, भारत बनेगा ग्लोबल एआई लीडर

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देहरादून एक बार फिर तकनीकी क्रांति का गवाह बना जब उत्तराखंड एआई इम्पैक्ट समिट 2025 का भव्य उद्घाटन केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने किया। होटल रमाडा में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन ने भारत की एआई यात्रा को नई उड़ान दी — वही भारत जो अब केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एआई का निर्माता बनने की राह पर है।

श्री जितिन प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा, “पिछली सदी में परमाणु तकनीक जितनी महत्वपूर्ण थी, उतनी ही इस सदी के लिए एआई है। फर्क बस इतना है कि इस बार भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि यह अवसर हर किसी तक पहुँचे।” उन्होंने ऐलान किया कि भारत अब “एक डॉलर प्रति घंटे से भी कम कीमत पर विश्वस्तरीय कंप्यूटिंग शक्ति” उपलब्ध करा रहा है — जिससे इनोवेशन, रिसर्च और डिजिटल लोकतंत्र को नई दिशा मिलेगी।

कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड सरकार के आईटी विभाग और भारत एआई मिशन (MeitY) के सहयोग से किया गया। इस मंच ने भारत में एआई के व्यावहारिक और सामाजिक प्रभावों को प्रदर्शित किया — एआई आधारित शासन, शिक्षा, ड्रोन तकनीक, उद्यमिता और सामाजिक नवाचार को केंद्र में रखते हुए।

आईटी सचिव श्री नितेश कुमार झा ने बताया कि उत्तराखंड सिर्फ एआई का इस्तेमाल नहीं कर रहा, बल्कि “एआई का निर्माण” कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमने उत्कृष्टता केंद्र और पहला ड्रोन एप्लिकेशन सेंटर स्थापित किया है, जहाँ एआई और ड्रोन तकनीक का अद्भुत संगम हो रहा है। इसी नवाचार के लिए हमें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।”

इस अवसर पर IIT रुड़की, IIM काशीपुर, UPES देहरादून, STPI, और Tony Blair Institute for Global Change जैसे अग्रणी संस्थानों ने भाग लिया। पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने युवाओं को एआई के माध्यम से “रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और वास्तविक सामाजिक परिवर्तन” की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

यह समिट आगामी इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (भारत मंडपम, नई दिल्ली) की एक झलक थी — जो ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई फोरम होगा। इस मंच के ज़रिए भारत न केवल तकनीकी ताकत बल्कि “एआई फॉर ऑल” के सिद्धांत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने जा रहा है।

देहरादून से शुरू हुई यह एआई यात्रा अब विश्व पटल पर भारत की पहचान बनने जा रही है — एक ऐसा भारत जो जिम्मेदार, समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण से एआई का भविष्य गढ़ रहा है।

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