देहरादून, 30 अक्टूबर 2025:
देवभूमि उत्तराखंड से एक बड़ी खबर आई है। उत्तराखंड गौ सेवा आयोग की कार्यकारिणी बैठक में आज ऐसे प्रस्ताव पारित किए गए हैं जो देशभर में चर्चा का विषय बन सकते हैं। आयोग ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए और गौवंश अपराधों के लिए पूरे देश में समान कानून बनाया जाए।
मोथरोवाला स्थित पशुधन भवन में आयोजित इस अहम बैठक की अध्यक्षता आयोग के मा. अध्यक्ष डॉ. पं. राजेन्द्र अणथ्वाल ने की। बैठक में राज्यभर में गौ सदनों की धीमी प्रगति पर उन्होंने कड़ी नाराज़गी जताई और निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों को तत्काल गति दी जाए।

बैठक में गौ संरक्षण को लेकर कई सख्त प्रस्ताव भी पारित किए गए —
अब सड़क पर गाय छोड़ने पर 10 हज़ार रुपए जुर्माना देना होगा (पहले यह राशि सिर्फ़ 2 हज़ार थी)। वहीं गौ तस्करी करने वालों को अब 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
डॉ. अणथ्वाल ने कहा कि “देवभूमि में गौ सेवा सबसे बड़ा सौभाग्य है। जो घर और गाँव में गाय होती है, वहाँ हमेशा समृद्धि रहती है। अब समय आ गया है कि गाय को केवल पूजा न जाए, बल्कि उसके संरक्षण के लिए ठोस कानून बनाए जाएँ।”
बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि राज्य की सीमाओं पर गौ तस्करी रोकने के लिए विशेष “गोवंश संरक्षण स्वाइड” पुलिस यूनिट बनाई जाएगी और सभी वाहनों की नियमित चेकिंग की जाएगी। हर गौवंश का जन्म-मृत्यु पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा, साथ ही नंदीशालाओं की स्थापना भी की जाएगी।
गौसदनों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार के लिए सरकार से पर्याप्त धनराशि आवंटित करने का भी प्रस्ताव पास हुआ। गौसदनों को साइलेज और पौष्टिक आहार सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने हेतु सहकारिता विभाग को निर्देश दिए गए।
बैठक में महावीर सिंह पंवार, सत्य प्रकाश सिंह, एस. त्रिपाठी, प्रो. संजय कुमार, उदय शंकर, गौरी मौलेखी, कमलेश भट्ट, धर्मवीर सिंह गुसाई, सतीश उपाध्याय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
यह बैठक उत्तराखंड में गौ संरक्षण के नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। अब देखना यह होगा कि आयोग के ये प्रस्ताव राज्य सरकार से होते हुए केंद्र तक पहुँचते हैं या नहीं।






