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माता अनसूया व चंडिका देवी के माघ स्नान पर कर्णप्रयाग में उमड़ा आस्था का सैलाब

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माता अनसूया व चंडिका देवी के माघ स्नान पर कर्णप्रयाग में उमड़ा आस्था का सैलाब

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गोपेश्वर (चमोली)। सती शिरोमणि माता अनसूया तथा चंडिका माता के कर्णप्रयाग संगम पर माघ स्नान पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। वर्षों बाद दो देवडोलियों के परस्पर मिलन और माघ स्नान के चलते भावपूर्ण माहौल बना था। दरअसल मकर संक्रांति के पर्व पर दशोली ब्लॉक के खल्लागांव की सती शिरोमणि माता अनसूया तथा जिलासू की चंडिका देवी देवरा यात्रा के तहत पिंडर तथा अलकनंदा के संगम पर स्थित कर्णप्रयाग संगम पर माघ स्नान को एक साथ पहुंची। दोनों देवडोलियों के परस्पर मिलन के चलते माहौल बेहद भावपूर्ण बना रहा। माता अनसूया देवी उमा देवी मंदिर में प्रवास के पश्चात सर्वप्रथम संगम पर माघ स्नान को पहुंची। धार्मिक रीति रिवाजों के बीच देवडोली ने संगम पर डुबकी लगाई। इसके बाद देवी का श्रृंगार कार्यक्रम संपन्न हुआ और हवन आदि की धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुई। इस दौरान संगम स्थल अनसूया देवी के जयकारों से गूंज उठा।

पोखरी ब्लॉक के जिलासू गांव की चंडिका देवी भी देवरा यात्रा पर निकली है। रात्रि प्रवास कर्णप्रयाग में ही ध्याणी के घर रही। इसी दौरान बुधवार को चंडिका देवी भी जयकारों के बीच संगम पर स्नान को पहुंची। स्नान के बाद दोनों देवडोलियों का परस्पर मिलन लोगों को भाव विभोर कर गया। इस अवसर पर चंडिका देवी के हवन आदि की धार्मिक क्रियाओं का संपादन हुआ। दोनों देवडोलियां एक दूसरे से मिली। इस दौरान दोनों देवडोलियों की जयकारों से कर्णप्रयाग संगम स्थल गूंज उठा। इस ऐतिहासिक क्षण में तमाम क्षेत्रों के आए लोगों ने भी स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसके बाद दोनों देवडोलियां उमा मंदिर गई। उमा मंदिर में दोनों की पूजा अर्चना का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद दोनों देवडोलियां एक दूसरे से विदा होकर अपने गंतव्य को आगे बढ़ी। अनसूया देवी की रथ डोली अपनी धियाण के घर कर्णप्रयाग प्रवास पर रही तो चंडिका देवी रात्रि प्रवास को गलनाऊं पहुंची।

अनसूया देवी की रथ डोली 51 वर्षों बाद देवरा यात्रा पर निकली है। जिलासू की चंडिका भी वर्षों बाद देवरा यात्रा पर चली है। इसके चलते वर्षों बाद मकर संक्रांति पर्व पर पंच प्रयागों में से एक कर्णप्रयाग में दोनों देवडोलियों के माघ स्नान के चलते आस्था सैलाब उमडा रहा। सभी लोगों ने इस दौरान देवडोलियों से सुख समृद्धि की मनौती मांगी। इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बनने के लिए वृद्ध लोगों का भी खासा हुजूम उमड़ा रहा। दिलचस्प बात यह है कि खल्लागांव के लोग तो इस धार्मिक आयोजन में शामिल तो रहे ही अपितु चंडिका देवी के गुठगांव के लोगों का भी इस दौरान हुजूम उमड़ा रहा। इस दौरान काफी वर्षों बाद कर्णप्रयाग संगम स्थल पर गजब की चहल-पहल देखने को मिली। लोगों ने पुष्प  वर्षा से दोनों देवडोलियों को अपने-अपने गंतव्य के लिए विदा किया। इस दौरान कई लोगों की आंखे छलछला उठी तो कई लोग भाव विह्वल हो उठे। इस तरह आस्था की इस अनूठी और अद्भूत यात्रा का दीदार करने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़ से इस बात को भी बल मिला है कि लोगों में देवी देवताओं के प्रति अटूट श्रद्धा व विश्वास मौजूदा दौर में भी पुख्ता होता जा रहा है। कर्णप्रयाग संगम स्थल पर माघ स्नान की यह बेला यादगार बन कर रह गई।

 

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