देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा और जिलाधिकारी सविन बंसल के विजनरी नेतृत्व में चलाया गया “प्रोजेक्ट उत्कर्ष” अब सरकारी स्कूलों की तस्वीर और तकदीर बदल रहा है।

कभी संसाधनों के अभाव से जूझ रहे सरकारी विद्यालय अब स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड, फर्नीचर, खेल मैदान, वॉटर टैंक, वाईट बोर्ड, और लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं से सुसज्जित हो चुके हैं। जिलाधिकारी स्वंय इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि हर बच्चे को निजी स्कूलों जैसी आधुनिक शिक्षा सुविधाएं मिल सकें।
प्रोजेक्ट ‘उत्कर्ष’ के तहत अब तक 379 वॉटर टैंक, 820 मंकी नेट, 428 बेबी स्लाइड, 321 झूले, 77 वॉलीबॉल कोर्ट, 129 बैडमिंटन कोर्ट और 474 विद्यालयों में ज्ञानवर्धक पेंटिंग्स लगाई गई हैं। इसके अलावा ONGC, HUDCO, और जिला खनिज न्यास के सहयोग से हजारों फर्नीचर सेट विद्यालयों में लगाए गए हैं।

जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय (त्यूनी, कोरबा, कालसी) को पूरी तरह डिजिटल और मॉडर्न बोर्डिंग स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ बच्चों के लिए स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट, प्रिंटर, CCTV, डबल डेकर बेड, स्पोर्ट्स शूज, रोटी मेकर, वॉशिंग मशीन, और वाटर प्यूरीफायर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
डीएम बंसल ने बताया कि “प्रोजेक्ट उत्कर्ष शिक्षा के उत्थान का आंदोलन है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में आत्मविश्वास जगाना और उन्हें आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है।”
प्रशासन ने शिक्षा सुधार के लिए एक करोड़ रुपये का विशेष फंड भी बनाया है, जिससे विकासखंडवार चरणबद्ध तरीके से सभी विद्यालयों को सुविधायुक्त किया जा रहा है। अब देहरादून के बच्चे न केवल पढ़ाई बल्कि खेल, तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं।






