देहरादून, 20 सितम्बर 2025।
भीषण आपदा से जूझ रहे उत्तराखण्ड के कई गांव जब मुख्यालय से कट गए, तब जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल ने जज़्बे और समर्पण का परिचय देते हुए कठिन रास्तों को पार कर प्रभावितों तक पहुंच बनाई। ढौंढ, ढंगार, गाढ़ और गदेरे पार करते हुए डीएम स्वयं पैदल 12 किमी का दुर्गम मार्ग तय कर फुलेत, छमरोली, सिल्ला, सिमयारा और क्यारा गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा कि “आज़ादी के बाद कोई डीएम पहली बार हमारे गांव आया है।”

आपदा की विकट परिस्थितियों में डीएम ने न केवल प्रभावित परिवारों का हाल जाना, बल्कि खेत-खलिहानों तक पहुंचकर नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन भी किया। उन्होंने अधिकारियों और कार्मिकों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात करते हुए निर्देश दिया कि राहत और मुआवजा वितरण का कार्य युद्धस्तर पर किया जाए। इसके लिए विशेष तहसीलदार, बीडीओ और अन्य विभागीय अधिकारियों को अग्रिम आदेशों तक गांवों में ड्यूटी पर लगाया गया है।
इससे पहले डीएम सविन बंसल ने मजाड़ और कार्लीगाड में रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग की, मालदेवता क्षेत्र में वाशआउट रोड का निरीक्षण किया और मसूरी में संपर्क मार्ग सुचारू करवाने के लिए मौके पर अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने साफ कहा कि “जिला प्रशासन हर परिस्थिति में आपदा प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है और जनजीवन सामान्य बनाने के लिए दिन-रात कार्यरत है।”
फुलेत और आसपास के गांवों तक पहले केवल हेली सेवा से ही रसद सामग्री पहुंचाई जा रही थी। लेकिन जिलाधिकारी ने हवाई विकल्प छोड़ पैदल मार्ग को अपनाया, ताकि वे स्वयं प्रभावित परिवारों के बीच जाकर राहत कार्यों की वास्तविक स्थिति देख सकें।






