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सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी, असमंजस में निवेशक और खरीदार

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सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी, असमंजस में निवेशक और खरीदार

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नई दिल्ली। सप्ताह की शुरुआत के साथ ही सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सोमवार, 29 जून 2026 को जारी ताजा दरों के अनुसार सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने वाले उपभोक्ता भी बाजार की चाल पर नजर बनाए हुए हैं।

प्रमुख शहरों में आज के भाव

देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोना करीब ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव ₹1.32 लाख से ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बना हुआ है। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1.08 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है, जिससे हल्के आभूषण खरीदने वालों को कुछ राहत मिल सकती है।

शहर 24 कैरेट (10 ग्राम) 22 कैरेट (10 ग्राम) 18 कैरेट (10 ग्राम) चांदी (प्रति किलो)
नई दिल्ली ₹1,43,550 ₹1,31,588 ₹1,07,663 ₹2,22,800
मुंबई ₹1,43,800 ₹1,31,817 ₹1,07,850 ₹2,23,180
पटना ₹1,43,720 ₹1,31,743 ₹1,07,790 ₹2,23,060
जयपुर ₹1,43,780 ₹1,31,798 ₹1,07,835 ₹2,23,150
कानपुर ₹1,43,840 ₹1,31,853 ₹1,07,880 ₹2,23,240

चांदी में भी नरमी

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट का रुख बना हुआ है। अधिकांश प्रमुख बाजारों में चांदी ₹2.20 लाख से ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के बीच कारोबार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आई है, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई है।

क्यों दबाव में हैं कीमतें?

विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों पर दबाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी प्रमुख कारण हैं। मजबूत डॉलर के कारण वैश्विक स्तर पर सोने की मांग प्रभावित होती है, जिससे कीमतों में नरमी आती है। इसके अलावा हाल के दिनों में सोने के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी की जा रही है। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ने के कारण कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में जल्दबाजी में बड़ी खरीदारी करने के बजाय बाजार पर नजर बनाए रखना बेहतर रहेगा। यदि निवेश का उद्देश्य लंबी अवधि का है, तो कीमतों में गिरावट के दौरान चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जा सकती है।

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