ईटानगर/नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर नाह आदिवासी समुदाय ने गंभीर चिंता जताई है। नाह वेलफेयर सोसाइटी (एनडब्ल्यूएस) ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि पिछले कुछ वर्षों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने समुदाय की पारंपरिक भूमि के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि जिन इलाकों में स्थानीय लोग वर्षों से शिकार, पशुपालन, खेती और वन उपज एकत्र करने जैसी गतिविधियां करते रहे हैं, वहां अब कथित तौर पर चीनी सेना की मौजूदगी है। संगठन ने दावा किया है कि वर्ष 2020 के बाद से सीमा क्षेत्र के कई स्थानों पर स्थानीय लोगों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।
पांच स्थानों पर गतिविधियों का आरोप
नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चाडर ने आरोप लगाया कि अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच स्थानों पर चीन की गतिविधियां बढ़ी हैं। संगठन का दावा है कि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन इलाकों में चीन लगातार अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। ज्ञापन में असाफिला क्षेत्र के ओयिंग, पनियार (चुजार्टा क्षेत्र), मारपान (मारनाफे), पोट्रांग झील और टिडिंगटैंग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए इन्हें स्थानीय समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत से जुड़ा बताया गया है।
भारतीय क्षेत्र में सड़क और सैन्य ढांचे का आरोप
संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि चीनी सेना ने भारतीय सीमा के भीतर सड़कें और अस्थायी सैन्य ढांचे विकसित किए हैं। हालांकि इन दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एनडब्ल्यूएस अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा कि समुदाय को भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, लेकिन सीमा क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियां चिंता का विषय हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थानीय समुदाय अपनी पुश्तैनी भूमि से वंचित हो सकता है।
विधायक ने मांगी आधिकारिक पुष्टि
नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इन आरोपों की आधिकारिक जांच और पुष्टि आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
सरकार की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
अब तक जिला प्रशासन, अरुणाचल प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन इस संबंध में कोई टिप्पणी उपलब्ध नहीं हो सकी। फिलहाल नाह आदिवासी समुदाय के दावों और ज्ञापन के आधार पर यह मामला चर्चा में है। आधिकारिक जांच या सरकारी पुष्टि के बाद ही सीमा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






