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विश्व संस्कृत दिवस से पहले उत्तराखण्ड की वैश्विक पहल, इंडोनेशिया के साथ संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर बढ़ेगा सहयोग, नई दिल्ली में इंडोनेशिया के कार्यवाहक राजदूत से मिले संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार

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विश्व संस्कृत दिवस से पहले उत्तराखण्ड की वैश्विक पहल, इंडोनेशिया के साथ संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर बढ़ेगा सहयोग, नई दिल्ली में इंडोनेशिया के कार्यवाहक राजदूत से मिले संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार

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नई दिल्ली। विश्व संस्कृत दिवस से पूर्व उत्तराखण्ड सरकार ने संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित इंडोनेशिया गणराज्य के दूतावास में कार्यवाहक राजदूत युधो सासोंगको से शिष्टाचार भेंट कर दोनों देशों के बीच संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की।

उत्तराखण्ड के संस्कृत मॉडल की दी जानकारी

बैठक के दौरान सचिव दीपक कुमार ने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिए जाने तथा इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में देववाणी संस्कृत को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड के प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम स्थापित किया गया है। अल्प अवधि में ही इन ग्रामों ने स्थानीय समुदायों को संस्कृत सीखने तथा भारत की दार्शनिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत से जोड़ने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

संस्कृत आयोग गठन की प्रक्रिया तेज

दीपक कुमार ने बताया कि राज्य में संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके लिए देशभर से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिन्हें विश्व संस्कृत दिवस से पूर्व 10 अगस्त तक उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा तथा दोनों देशों के युवा अपनी साझा सांस्कृतिक विरासत को और अधिक गहराई से समझ सकेंगे।

इंडोनेशियाई भाषा में आज भी जीवित है संस्कृत का प्रभाव

बैठक में उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई भाषा में आज भी संस्कृत मूल के अनेक शब्द प्रचलित हैं, जो भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों के सशक्त प्रमाण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भी कहा था कि इंडोनेशियाई भाषा का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा संस्कृत से प्रभावित है। यह दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

विश्वविद्यालयों के बीच एमओयू का प्रस्ताव

संस्कृत शिक्षा सचिव ने इंडोनेशिया दूतावास के सहयोग से हरिद्वार स्थित उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम का इंडोनेशिया के विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि इस पहल से दोनों देशों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी और संस्कृत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।

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