नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह न तो Representation of the People Act, 1950 और न ही Aadhaar Act के तहत नागरिकता का सबूत है।
पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आधार कार्ड केवल पहचान का प्रमाण है, न कि जन्म तिथि, निवास या नागरिकता का दस्तावेज। यह बयान उस समय आया है जब बिहार में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर आधार कार्ड की वैधता पर सवाल उठे थे।
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा, “चुनाव आयोग ने आधार नंबर को मतदाता सूची के संशोधन फार्म में केवल वैकल्पिक रूप से शामिल किया है। आधार देना अनिवार्य नहीं है — यह पूरी तरह आधार धारक की इच्छा पर निर्भर करता है।”
उन्होंने आगे बताया, “यदि किसी व्यक्ति ने 2023 के बाद आधार कार्ड प्राप्त किया या डाउनलोड किया है, तो उसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि आधार कार्ड नागरिकता या जन्म तिथि का प्रमाण नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं और उसी के तहत निर्देश जारी किए गए हैं।”
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR मामले में कहा था कि आधार कार्ड पहचान का प्रमाण तो है, लेकिन नागरिकता का नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संशोधन के लिए आधार को नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।






