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करोड़ों की कोठी में अकेलेपन की मौत: राजिंदर नगर में बुजुर्ग ननद-भाभी के शव मिलने से उठे कई सवाल

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करोड़ों की कोठी में अकेलेपन की मौत: राजिंदर नगर में बुजुर्ग ननद-भाभी के शव मिलने से उठे कई सवाल

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मध्य जिले स्थित राजिंदर नगर इलाके में एक घर के भीतर दो बुजुर्ग महिलाओं के शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतकों की पहचान 80 वर्षीय सरोज बाला और उनकी भाभी चंद्रकांता के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में पुलिस को घर में जबरन प्रवेश या संघर्ष के कोई संकेत नहीं मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि दोनों की Sham एक-दो दिन पहले हुई होगी। यह घटना सिर्फ दो महिलाओं की मौत भर नहीं, बल्कि महानगरों में बढ़ते अकेलेपन और रिश्तों के टूटते दायरे की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आई है।

कामवाली को बदबू से हुआ शक

पुलिस के मुताबिक, बृहस्पतिवार सुबह घरेलू सहायिका जब घर पहुंची तो अंदर से तेज दुर्गंध आ रही थी। कई बार आवाज देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो एक महिला का शव बिस्तर पर और दूसरी का शव फर्श पर पड़ा मिला।

मध्य जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि घर के सभी दरवाजे अंदर से बंद थे और जांच के दौरान किसी तरह की लूटपाट, संघर्ष या जबरन घुसपैठ के संकेत नहीं मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

20 करोड़ की कोठी, लेकिन जिंदगी में सन्नाटा

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस मकान में दोनों महिलाएं रहती थीं उसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इतनी बड़ी संपत्ति के बावजूद दोनों की जिंदगी बेहद सीमित और अकेलेपन से भरी थी।

सरोज बाला अविवाहित थीं और बिजली विभाग से सेवानिवृत्त हुई थीं। उनके भाई भारतीय सेना में थे, जिनका कोरोना काल के दौरान निधन हो गया था। भाई की पत्नी चंद्रकांता लंबे समय से बीमार थीं और घर से बाहर नहीं निकलती थीं। दोनों की कोई संतान नहीं थी।

पड़ोसियों का कहना है कि दोनों महिलाओं को बहुत कम बाहर आते-जाते देखा जाता था। पास की मदर डेयरी के दुकानदार ने बताया कि महीने में एक-दो बार ही उन्हें दूध लेते देखा जाता था।

“पड़ोसी नहीं, सिर्फ पता बनकर रह गए लोग”

इस घटना ने राजधानी की सामाजिक संवेदनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों की आबादी वाले शहर में दो बुजुर्ग महिलाएं अकेले जिंदगी और मौत से जूझती रहीं, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी।

स्थानीय निवासी श्रीधर ने बताया कि कभी-कभार सरोज बाला से मुलाकात हो जाती थी, लेकिन वे बेहद कम बोलती थीं। आसपास रहने वाले अधिकतर लोग उन्हें सिर्फ चेहरे से जानते थे।

पुलिस कई एंगल से कर रही जांच

पुलिस का कहना है कि गर्मी, बीमारी, कमजोरी या लंबे समय से चली आ रही मानसिक और शारीरिक परेशानियां मौत की वजह हो सकती हैं। हालांकि, फिलहाल आत्महत्या समेत सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

पुलिस घरेलू सहायिका और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है तथा महिलाओं के अन्य परिजनों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। यह घटना एक बार फिर उस सवाल को सामने खड़ा करती है कि आधुनिक शहरों में ऊंची इमारतें और करोड़ों की संपत्ति तो बढ़ रही है, लेकिन इंसानी रिश्ते और सामाजिक जुड़ाव लगातार कमजोर होते जा रहे हैं।

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