मुंबई। भारत और अमेरिका के बीच आयोजित एक प्रदर्शनी खेल ‘Checkmate: USA vs India’ में Hikaru Nakamura द्वारा D Gukesh का राजा फैंस में फेंकने की घटना ने शतरंज जगत में बहस छेड़ दी है। अमेरिका के टेक्षास में हुए इस आयोजन में 1,100 से अधिक दर्शक मौजूद थे, और खिलाड़ियों को दर्शकों के साथ इंटरैक्ट करने के लिए कहा गया था।
घटना के बाद प्रतिक्रिया मिश्रित रही। FIDE के CEO Emil Sutovsky और पूर्व विश्व चैंपियन Vladimir Kramnik ने Nakamura की आलोचना की, जबकि Peter Heine Nielsen और Anish Giri ने इसे सामान्य बताया। भारतीय GM Vidit Gujrathi ने इसे पश्चिम और भारत में शतरंज की सांस्कृतिक समझ का अंतर बताया। भारत में शतरंज को पूजा जैसा माना जाता है, जबकि पश्चिम में यह सिर्फ एक खेल है।
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य पारंपरिक शतरंज से हटकर इसे मनोरंजक बनाना था। आयोजकों ने खिलाड़ियों को खेल के दौरान राजा को फोड़ने या फैंस में फेंकने के लिए प्रेरित किया। वीडियो में Gukesh मुस्कुराते हुए अपने राजा को फैंस में जाता देख सकते हैं, जिससे स्पष्ट है कि उन्हें आपत्ति नहीं थी।
इतिहास में भी खिलाड़ियों के विवादास्पद व्यवहार का उदाहरण मिलते हैं। Emmanuel Lasker अपने विरोधियों को परेशान करने के लिए सिगार का धुआँ फैलाते थे, Alexander Alekhine शराब के नशे में खेलते थे। Bobby Fischer और Boris Spassky के मैच में भी विवाद हुए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि Nakamura का यह कदम शतरंज के लिए अपमानजनक नहीं था, बल्कि खेल को दर्शकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने का एक तरीका था। भविष्य में आयोजक इसी तरह के मनोरंजक और विवादास्पद क्षणों के जरिए शतरंज की लोकप्रियता बढ़ाने की कोशिश करेंगे, लेकिन खिलाड़ी यह तय करेंगे कि कब तक इसे स्वीकार करें।
Nakamura का यह कदम यह दर्शाता है कि शतरंज अब केवल खेल नहीं रहा, बल्कि एक मनोरंजक तमाशा बनता जा रहा है। वहीं 19 वर्षीय विश्व चैंपियन Gukesh ने भारी हार के बावजूद अपने खेल के प्रति धैर्य और अनुशासन बनाए रखा। यह घटना शतरंज के भविष्य और खेल तथा मनोरंजन के बीच संतुलन की एक झलक पेश करती है।












