रुद्रपुर। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में परिवहन विभाग ने बुधवार देर रात एक ऐसी बस पकड़ी, जिसमें निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों को ठूंसकर ले जाया जा रहा था। बस में कुल 168 यात्री सवार मिले, जिनमें 138 वयस्क और 30 बच्चे शामिल थे। हैरानी की बात यह रही कि बस को महज 30 स्लीपर और एक सीट के लिए पास किया गया था। इसके बावजूद बस लंबी दूरी के सफर पर यात्रियों को लेकर निकली थी।
परिवहन विभाग की टीम ने लालपुर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान बस को रोककर कार्रवाई की। जांच में बस के बिना टैक्स और बिना वैध परमिट संचालित होने की भी बात सामने आई। विभाग ने बस का चालान कर उसे रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन पर सीज कर दिया।
रात करीब एक बजे पकड़ी गई बस
संभागीय परिवहन अधिकारी अरविंद पांडेय के निर्देश पर और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नवीन सिंह के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम बुधवार रात लालपुर में चेकिंग अभियान चला रही थी। रात करीब एक बजे टीम ने बस संख्या NL 02B3020 को रोका।
परिवहन कर अधिकारी जितेंद्र सिंगवान और प्रभारी सुतैया सचल दल ने बस की जांच की तो उसमें 138 बड़ी सवारियां और 30 बच्चे मिले। इस तरह बस में कुल 168 यात्री सवार थे।
30 स्लीपर की अनुमति, 168 यात्री सवार
जांच में सामने आया कि बस को केवल 30 स्लीपर और एक सीट के संचालन के लिए पास किया गया था। इसके बावजूद बस में क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों को बैठाकर सफर कराया जा रहा था। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को लेकर बस का संचालन सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
यह बस लखीमपुर खीरी से अंबाला, लुधियाना, खन्ना और जालंधर की ओर जा रही थी। परिवहन विभाग ने ओवरलोडिंग, बिना टैक्स, बिना परमिट सहित नियमों के उल्लंघन के विभिन्न मामलों में बस का चालान किया।
बस सीज, यात्रियों के लिए कराई वैकल्पिक व्यवस्था
कार्रवाई के बाद बस को रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन में सीज कर दिया गया। यात्रियों को बीच रास्ते में परेशानी न हो, इसके लिए परिवहन निगम के अधिकारियों के सहयोग से वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था कराई गई। कार्रवाई में राजीव तिवारी, परिवहन आरक्षी दिनेश सिंह, परिवहन आरक्षी नंद राम सहित सचल दल के चालक शामिल रहे।
ओवरलोड बसों से बचने की अपील
परिवहन विभाग ने यात्रियों से अपील की है कि वे क्षमता से अधिक सवारियां ले जाने वाली बसों में सफर न करें। विभाग के अनुसार, ओवरलोड वाहन दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रखने की बात कही गई है।
सवाल यह है कि महज 30 स्लीपर और एक सीट के लिए स्वीकृत बस में 168 यात्रियों को लेकर संचालन कैसे होता रहा। परिवहन विभाग की यह कार्रवाई न केवल ओवरलोडिंग पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लंबी दूरी की बस सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा और परमिट व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल सामने लाती है।






