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कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पहले प्राकृतिक बुद्धिमता का प्रयोग करना जरूरी – पद्म भूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पहले प्राकृतिक बुद्धिमता का प्रयोग करना जरूरी – पद्म भूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी

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  • भारतीय ज्ञान प्रणालियों के ढांचों के साथ मनोवैज्ञानिक निदान और उपचार प्रक्रियाओं के एकीकरण पर 7वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन।

ऋषिकेश : श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर में भारतीय ज्ञान प्रणालियों के ढांचों के साथ मनोवैज्ञानिक निदान और उपचार प्रक्रियाओं के एकीकरण विषय पर 7वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन Speakingcube Online Mental Health Consulting Foundation द्वारा SPECS और विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लेकर मानसिक स्वास्थ्य और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट मीतू शारदा के स्वागत भाषण से हुआ। इसके बाद दीप प्रज्वलन कर देवी सरस्वती का आह्वान किया गया तथा सभी सजीव प्राणियों की समृद्धि की कामना की गई।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यावरणविद् एवं पद्मश्री तथा पद्म भूषण से सम्मानित अनिल प्रकाश जोशी उपस्थित रहे। संरक्षक के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति एन. के. जोशी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रीता कुमार ने की, जबकि सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में चेतन शारदा और कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में एम. एस. रावत, जी. के. ढींगरा तथा बृजमोहन शर्मा उपस्थित रहे।

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में ताशी त्सम्फले, नील कोब्रिन (एकेडमी ऑफ माइंडफुल साइकोलॉजी, कैलिफोर्निया) तथा वेनोथ रेक्स (INTI विश्वविद्यालय, मलेशिया) शामिल हुए। इसके अलावा प्रख्यात वक्ताओं के रूप में शालिनी सिंह और प्रेरणा वर्मा ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन में वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, माइंडफुलनेस, पारंपरिक जीवन मूल्यों और आधुनिक मनोविज्ञान के बीच संबंधों पर विस्तृत चर्चा की।

डॉ. नील कोब्रिन ने मानसिक स्वास्थ्य में माइंडफुलनेस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सचेतनता की तकनीकें तनाव और मानसिक विकारों को कम करने में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। वहीं डॉ. वेनोथ रेक्स ने नेतृत्व और प्रबंधन के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों के महत्व पर चर्चा करते हुए कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ पर अपने शोध के बारे में जानकारी दी और संस्थागत स्तर पर सहयोग का प्रस्ताव रखा। डॉ. ताशी त्सम्फले ने बौद्ध दर्शन में माइंडफुलनेस, कर्म और पारस्परिक निर्भरता के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता बताई।

इसी क्रम में डॉ. जी. के. ढींगरा ने पारंपरिक और सांस्कृतिक मूल्यों को आधुनिक जीवन में जोड़ते हुए विशेष रूप से जनरेशन-Z के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक व्यवस्था के प्रभाव पर चर्चा की। SPECS के निदेशक डॉ. बृजमोहन शर्मा ने समग्र कल्याण के लिए सांस्कृतिक मूल्यों और पारंपरिक व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया। सम्मेलन की अध्यक्षा प्रो. डॉ. दीपिका चमोली शाही ने आयोजन संस्थाओं का परिचय देते हुए मानसिक आघात (ट्रॉमा) के प्रभाव को कम करने की तकनीकों पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने अपने संबोधन में आधुनिक समय में बढ़ती मनोवैज्ञानिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए “प्राकृतिक बुद्धिमत्ता” (Natural Intelligence) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक बुद्धिमत्ता मानव जीवन को प्रकृति के साथ संतुलन में रखने का मार्ग दिखाती है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भिन्न है। उन्होंने इस पहल के लिए Speakingcube और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय को बधाई दी।

विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ हुए सम्मानित

सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। इनमें प्रमुख रूप से

  • डॉ. अरुण कुमार (गुरु कांगड़ी विश्वविद्यालय)
  • डॉ. सुनीता शर्मा
  • डॉ. सूरज कुमार पारचा (सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद)
  • नमिता ममगाईं
  • डॉ. दिनेश सिंह (श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय)
  • इंद्राणी पांधी (हिमांचल टाइम्स)
  • डॉ. सुरभि गुप्ता
  • डॉ. नीरजा गोयल
  • यस पाल अजमानी
  • मोना बाली (नारी शिल्प विद्यालय, देहरादून)
  • प्रो. विनय शंकर दुबे (ब्रूक फील्ड यूनिवर्सिटी, पेरिस)
  • प्रोफेसर प्रियंका तिवारी (मानव रचना यूनिवर्सिटी)
  • डॉ. दिग्विजय पांडे (तकनीकी शिक्षा मंत्रालय)
  • रितेश सिन्हा (ट्यूरिंग)
  • प्रो. (डॉ.) सारा जावेद (एएमयू)
  • प्रो. (डॉ.) रीमा पंत
  • प्रो. (डॉ.) मनीष वर्मा (एलपीयू)
  •  साक्षी सिंह (प्रसार भारती) शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. ताशी त्सम्फले ने सम्मेलन की आयोजन टीम के सदस्यों को भी सम्मानित किया। अंत में स्नेहा भारद्वाज और काजल तोमर ने आभार व्यक्त करते हुए सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का धन्यवाद किया।

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