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सांसद डॉ. नरेश बंसल ने राज्यसभा में की डॉ. नित्यानंद के जन्म शताब्दी वर्ष में डाक टिकट जारी करने व पद्म सम्मान देने की मांग

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सांसद डॉ. नरेश बंसल ने राज्यसभा में की डॉ. नित्यानंद के जन्म शताब्दी वर्ष में डाक टिकट जारी करने व पद्म सम्मान देने की मांग

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नई दिल्ली/देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने राज्यसभा में विशेष उल्लेख के माध्यम से सरकार से मांग की कि देहरादून के डीबीएस कॉलेज में भूगोल के प्रोफेसर रहे प्रख्यात समाजसेवी स्व. डॉ. नित्यानंद के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाए और उन्हें मरणोपरांत पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाए।

सांसद ने सदन में कहा कि स्व. डॉ. नित्यानंद का पूरा जीवन सेवा, समर्पण और त्याग की अनूठी मिसाल रहा है। वर्ष 1991 में गढ़वाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद प्रभावित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने मनेरी को केंद्र बनाकर संघ के स्वयंसेवकों के माध्यम से लगभग 50 गांवों में सेवा कार्यों का मार्गदर्शन किया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 से आंशिक पक्षाघात (Partial Paralysis) से पीड़ित होने के बावजूद इस कर्मयोगी ने चिकित्सकों की सलाह की परवाह किए बिना पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में अपना प्रवास जारी रखा। उनके मार्गदर्शन में 400 से अधिक परिवारों को भूकंपरोधी आवास उपलब्ध कराए गए।

सांसद ने कहा कि 1945 से लेकर जीवन की अंतिम सांस तक संघ के पूर्णकालिक स्वयंसेवक रहे डॉ. नित्यानंद को उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति के गठन का श्रेय भी जाता है। यह समिति पिछले 34 वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में आई आपदाओं के दौरान पीड़ितों की सहायता में सक्रिय रही है।

उन्होंने बताया कि डॉ. नित्यानंद को वास्तव में आधुनिक संत की संज्ञा दी जा सकती है। उन्होंने अपनी माता के नाम पर श्रीमती भगवती देवी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके माध्यम से प्रतिवर्ष 40 मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती रही।

इतिहास और भूगोल विषय पर कई पुस्तकों के लेखक डॉ. नित्यानंद हिमालय पर अपने शोध और ग्राम विकास कार्यों के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। उनके नाम पर देहरादून में डॉ. नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र का निर्माण भी किया जा रहा है।

राज्यसभा में अपने वक्तव्य के दौरान सांसद ने कहा कि डॉ. नित्यानंद आधुनिक युग के दधीचि के समान थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन उत्तराखंड की घाटियों में सेवा और समाज कार्य के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि स्व. डॉ. नित्यानंद के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया जाए और उन्हें पद्म पुरस्कार से अलंकृत किया जाए।

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