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मानव-भालू संघर्ष पर रोक को कवायद शुरू

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मानव-भालू संघर्ष पर रोक को कवायद शुरू

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गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के निर्देशानुसार मानव-भालू संघर्ष के प्रभावी एवं वैज्ञानिक समाधान को लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सी. रमेश ने ज्योतिर्मठ क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क के उप वन संरक्षक  अभिमन्यु द्वारा डॉ. सी. रमेश को ज्योतिर्मठ क्षेत्र में भालू की मौजूदा स्थिति, पूर्व में घटित मानव-भालू संघर्ष की घटनाओं तथा संवेदनशील क्षेत्रों के संबंध में जानकारी दी। भालू संभावित एवं प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण किया ताकि क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके। इस अवसर पर नगर पालिका द्वारा निर्मित नवीन प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण स्थल का भी स्थलीय निरीक्षण एवं वैज्ञानिक विश्लेषण किया। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित एवं अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

विशेषज्ञ द्वारा कूड़ा निस्तारण स्थलों के कारण वन्यजीवों, विशेषकर भालुओं की गतिविधियों में हो रहे व्यवहारिक परिवर्तनों का गहन अध्ययन किया गया।  नवीन कूड़ा निस्तारण स्थल पर वन्यजीवों की आवाजाही को रोकने एवं मानव-भालू संघर्ष की संभावनाओं को न्यून करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। टीम ने टीसीपी व्यू पॉइंट के समीप स्थित चुंगीधार क्षेत्र में वर्तमान कूड़ा निस्तारण स्थल में पाया कि कूड़े की उपलब्धता के कारण भालू मानव आबादी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे जन-सुरक्षा एवं वन्यजीव संरक्षण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कूड़ा निस्तारण बंद किए जाने के उपरांत चुंगीधार क्षेत्र को वैज्ञानिक पद्धति से भालू के प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित किए जाने तथा अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।ं इस दौरान ड्रोन से भालू प्रभावित क्षेत्रों एवं हैबिटेट का निरीक्षण भी किया गया। भारतीय वन्यजीव संस्थान का वैज्ञानिक दल ने जानकारी दी कि जल्द  ही ज्योतिर्मठ क्षेत्र का पुनः भ्रमण कर मानव-भालू संघर्ष निवारण हेतु अल्पकालिक  एवं दीर्घकालिक  उपायों समेत एक विस्तृत रणनीति एवं कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। इसमें आवास विकास, प्राकृतिक वनस्पति की पुनर्बहाली, सुरक्षा उपाय एवं सतत निगरानी व्यवस्था शामिल की जाएगी।

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