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आईएमस यूनिसन विश्वविद्यालय में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

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आईएमस यूनिसन विश्वविद्यालय में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

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देहरादून: आईएमस यूनिसन विश्वविद्यालय के विधि संकाय (School of Law) ने 17 अप्रैल 2026 को अपार उत्साह एवं शैक्षणिक गंभीरता के साथ स्वास्थ्य सेवा, व्यापार एवं वाणिज्य में उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग से उत्पन्न कानूनी, नैतिक एवं विनियामक चुनौतियाँ विषय पर अपने चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। 17-18 अप्रैल 2026 को आयोजित यह दो-दिवसीय सम्मेलन नाइजीरिया के स्काईलाइन विश्वविद्यालय के सहयोग से संपन्न हो रहा है।

इस उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता मुख्य अतिथि के रूप में सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता, भारत सरकार की पूर्व विदेश राज्य मंत्री एवं संस्कृति राज्य मंत्री, मीनाक्षी लेखी ने की। लेखी पूर्व में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए संसद सदस्य रह चुकी हैं। वर्ष 2014 में 16वीं लोकसभा तथा 2019 में 17वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित होकर वे कानूनी उत्कृष्टता एवं सार्वजनिक सेवा की प्रेरणास्रोत रही हैं।

मुख्य अतिथि ने विश्वविद्यालय की शहीद-स्मृति दीवार (Wall of Martyrs) पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा कुलपति डॉ. अनिल सुब्बाराव पैला एवं प्रो कुलपति डॉ. अनिता रामाचंद्र सहित विश्वविद्यालय के गणमान्य पदाधिकारियों द्वारा उनका उष्ण अभिनंदन किया गया। सम्मेलन अध्यक्षों — IMS यूनिसन विश्वविद्यालय के विधि संकाय के डीन डॉ. अमित अडलखा एवं नाइजीरिया के स्काईलाइन विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय के डीन डॉ. मुहम्मद नुरुद्दीन (जो वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए) — ने समस्त प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया।

सभा में उपस्थित विद्वानों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए लेखी ने वर्ष 2016-2019 के दौरान संसदीय विशेषाधिकार समिति की अध्यक्ष के रूप में लैंगिक समानता की अभिव्यक्ति से संबंधित एक प्रसंग साझा किया, जिसमें उन्होंने संसदीय एवं कानूनी ग्रंथों में पुल्लिंग सर्वनाम “he” के स्थान पर “she” जैसे लैंगिक-तटस्थ समावेशी शब्दों के प्रयोग की अनुशंसा की थी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संतुलित कानूनी ढाँचे तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए वैश्विक वाणिज्यिक प्रणाली में निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं अनुपालन सुनिश्चित करने में अपरिहार्य हैं, क्योंकि कानून समाज से परे नहीं, बल्कि उसी के व्यापक दायरे में संचालित होता है। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने व्यापार, वाणिज्य एवं स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा स्वचालन से उत्पन्न चुनौतियों पर विद्वानों, विशेषज्ञों एवं नीति-निर्माताओं को एकत्रित करने के लिए आयोजकों की सराहना की।
इस सम्मेलन को अभूतपूर्व प्रतिसाद प्राप्त हुआ है — 55 प्रतिष्ठित संस्थानों से 110 से अधिक शोध-सारांश प्राप्त हुए हैं, जिनमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, दिल्ली विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय, कलिंग इंस्टिट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT), नाइजीरिया का लागोस विश्वविद्यालय तथा सह-आयोजक संस्था स्काईलाइन विश्वविद्यालय, नाइजीरिया सम्मिलित हैं। यह व्यापक भागीदारी सम्मेलन के विषय की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करती है एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर अंतःविषयक संवाद की बढ़ती आवश्यकता को प्रतिबिंबित करती है।

यह सम्मेलन छह प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित है: कृत्रिम बुद्धिमत्ता की जवाबदेही एवं स्वचालित निर्णय-निर्माण; कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व, पर्यावरणीय संधारणीयता एवं अभिशासन; नैतिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली निर्माण में उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका; उभरती प्रौद्योगिकियाँ: तकनीकी, कानूनी एवं विनियामक ढाँचे; कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में साइबर सुरक्षा एवं डेटा संरक्षण; तथा डिजिटलीकरण का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव।

उद्घाटन सत्र का समापन संयोजक डॉ. शुऐब मोहम्मद के धन्यवाद-ज्ञापन के साथ हुआ, जिसने आगामी दो दिनों में होने वाली गहन शैक्षणिक विचार-विमर्श की पृष्ठभूमि तैयार की। सम्मेलन में विशेषज्ञ पैनल, शोध-प्रस्तुतियाँ एवं सहयोगी सत्रों का आयोजन होगा, जो एक जिम्मेदार एवं संधारणीय AI-संचालित वाणिज्यिक पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

 

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