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फूलों की घाटी में कैमरे में कैद हुए कस्तुरी मृग, स्नो लेपर्ड और मोनाल

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फूलों की घाटी में कैमरे में कैद हुए कस्तुरी मृग, स्नो लेपर्ड और मोनाल

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पोखरी (चमोली)। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी में कस्तुरी मृग, मोनाल तथा स्नो लैपर्ड समेत तमाम दुर्लभ वन्य जीवों की सक्रियता ट्रेक कैमरों में कैद हुई है। वन्य जीव सुरक्षा और संरक्षण को लेकर वनकर्मियों का दल उत्तरी हिमालयी क्षेत्रों में ड्रोन सर्वे अभियान को निकला था। नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ अभिमन्यु ने बताया कि इस अभियान में टीम की ओर से जैव विविधता एवं कैमरा ट्रेक परिणाम के तहत फूलों की घाटी क्षेत्र में स्थापित कैमरा ट्रेप्स की जांच में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

गश्त के दौरान हिम तेंदुआ, कस्तुरी मृग, मोनाल, गुलदार, लेपर्ड केट, भालू, हिमालयन शैरो, थार और यलो थ्रोटेड माल्र्टन जैसे दुर्लभ वन्य जीव कैमरे में कैद हुए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकाल में घाटी में तमाम सुविधाओं को लेकर तैयारियां प्रारंभ की जाएगी। जून माह में इसके तहत व्याख्या केंद्र का नवीनीकरण कर वैली की सेर करने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएगी। इसके तहत ऑनलाइन बुकिंग और ईडीसी की क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाएगा। बताया कि विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी रेंज की वनकर्मियों की टीम ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्य जीवों की निगरानी के लिए छह दिन का सघन गश्त अभियान चलाया था। टीम वापस लौट आई है। शीतकाल के दौरान अवैध गतिविधियों पर अंकूश लगाने और वन्य जीवों के पारिस्थितिकीय तंत्र का अध्ययन करने के लिए यह आयोजन किया गया था।

दल ने पुलना, जंगलचट्टी, भ्यूंडार, घांघरिया तथा फूलों की घाटी के मुख्य क्षेत्रों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। इस अभियान में टीम ने जैव विविधता एवं कैमरा ट्रेप परिणाम के तहत क्षेत्र में स्थापित कैमरा ट्रेप्स की जांच की तो अच्छे परिणाम सामने आए हैं। बताया कि फूलों की घाटी, घांघरिया तथा भ्यूंडार इलाके में ड्रोन के माध्यम से हवाई सर्वेक्षण किया गया। ड्रोन से ली गई तस्वीरों और वीडियो के विश्लेषण से दुर्गम क्षेत्रों की भी निगरानी संभव हो पाई है। इन इलाकों में मानवीय पहुंच बेहद कठिन है। इस दौरान कोई अवैध गतिविधियों के साक्ष्य नहीं मिले। गश्तीदल में अनुभाग अधिकारी जयप्रकाश, वन बिट अधिकारी नरेंद्र सिंह, मानसिंह, अरविंद सिंह, नागेंद्र सिंह, प्रीतम सिंह, मनोज भट्ट, अजय रावत शामिल रहे। कहा कि इस तरह की स्थिति से स्पष्ट को गया है कि इस क्षेत्र में दुर्लभ वन्य जीव प्राणियों को विचरण शीतकाल में भी जारी है और सभी वन्य जीव सुरक्षित हैं।

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